एक्यूट लिवर फेल्योर (ALF) एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा स्थिति है जिसमें लिवर तेज़ी से अपनी कार्य करने की क्षमता खो देता है। यह अक्सर बिना किसी पूर्व-मौजूद लिवर रोग वाले लोगों में होता है। क्योंकि यह तेज़ी से बढ़ता है, यह एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसके लिए लिवर ट्रांसप्लांट क्षमता वाले केंद्र में तुरंत स्थानांतरण की ज़रूरत होती है।
कारण
भारत में आम कारणों में शामिल हैं:
- वायरल हेपेटाइटिस (हेपेटाइटिस A, B, E)
- दवा-प्रेरित लिवर चोट (पैरासिटामोल ओवरडोज़, हर्बल दवाइयाँ, एंटी-ट्यूबरकुलोसिस दवाइयाँ)
- विल्सन रोग (एक आनुवंशिक कॉपर चयापचय विकार)
- ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस
- अज्ञात कारण (लगभग 15-20% मामलों में)
चेतावनी संकेत
एक्यूट लिवर फेल्योर का संदेह तब होना चाहिए जब किसी व्यक्ति में विकसित हो:
- पीलिया जो तेज़ी से बिगड़ता है
- भ्रम या असामान्य व्यवहार (एन्सेफैलोपैथी)
- पेट में सूजन
- मसूड़ों, नाक, या कहीं और से रक्तस्राव
यदि आप ये संकेत देखें, तो तुरंत लिवर ट्रांसप्लांट सुविधाओं वाले निकटतम अस्पताल जाएँ। समय महत्वपूर्ण है।
उपचार
ALF का प्रबंधन ICU में होता है:
- अंतर्निहित कारण का इलाज
- विफल हो रहे अंग प्रणालियों का समर्थन
- मस्तिष्क की सूजन (सेरेब्रल एडिमा) का प्रबंधन
- संक्रमण और रक्तस्राव की रोकथाम
जिन मरीज़ों में चिकित्सा प्रबंधन से सुधार नहीं होता, उनमें आपातकालीन लिवर ट्रांसप्लांट जीवन रक्षक हो सकता है।